"KNOWLEDGE IS POWER. INFORMATION IS LIBERATING. EDUCATION IS THE PREMISE OF PROGRESS, IN EVERY SOCIETY, IN EVERY FAMILY."
Pages
- ABOUT MY LIBRARY
- LIBRARY RULES
- LIBRARY POLICY
- LIBRARY ACTIVITY CARDS
- NEWS PAPERS AND PERIODICALS
- FREE RESOURCE MATERIAL
- SUNO KAHANI : A COLLECTION OF AUDIO BOOKS
- E-GRANTHALAYA TIPS AND TROUBLESHOOTING
- READERS CLUB ACTIVITIES
- LIBRARY COMMITTEE MEETING RECORDS
- PISA
- SYLLABUS
- CBSE 10-12th PAPERS
- ALAP(2021-22)
- STUDENTS CORNOR
- NEWSLETTERS
- LIBRARIAN'S DAIRY
- STUDENTS CORNOR
- COMICS AND MAGAZINES FOR STUDENTS
- STUDY MATERIAL : Online classes and teaching Topics covered by Teacher
Friday, 28 August 2026
J K Rowling Brithday 31/07/2026
जे. के. रोलिंग (Joanne Rowling जोआन रोलिंग, उर्फ़ Joanne Kathleen Rowling जोन कैथलीन रोलिंग) आज के ज़माने की सबसे प्रख्यात लेखिकाओं में से एक हैं। अंग्रेज़ी में लिखा उनका उपन्यास-क्रम हैरी पॉटर इक्कीसवीं सदी का शायद सबसे प्रसिद्ध उपन्यास है!
रोलिंग को चौदह साल की उम्र तक किताब पढ़ने में ज्यादा रुचि नहीं थी, जो स्कूल के लिए अनिवार्य था, उन्होंने वह पढ़ा, लेकिन इससे ज़्यादा कुछ नहीं। लेकिन जब उनकी सहेली ने "जादूगरों और चुड़ैलों" की किताब उन्हें दी तो यह बुरी हालत एकदम बदल गयी। उन्होंने किताब पढ़ना शुरू कर दिया। वह किताब "हैरी पौटर" का पहला खंड था। इसके बाद लगभग हर एक साल एक-एक "हैरी पौटर" की किताब प्रकाशित हुई। उस समय उन्होंने पूरा दिन अपने कमरे में बिताया और बहुत उत्सुकता से उन्होने पढ़ा। शुरू में कुछ लिखकर-पढ़कर उन्हें बड़ी सफलता नहीं मिली, फिर बाद में यह हालत अचानक बदली और वे बड़ी लेखिका बन गयी।
जे. के. रोलिंग ने मिथक और कल्पना कि एक नई और अनोखी दुनिया बनायी है, जिसका मुख्य पात्र हैरी पॉटर है। ये दुनिया जादू और चमत्कार से भरी पड़ी है। हैरी पॉटर ख़ुद एक (अनाथ) जादूगर है और वो तन्त्र-मन्त्र और जादू-टोने के विद्यालय हॉग्वार्ट्स जाता है। कहानी हैरी की एक आतंकवादी और शैतानी जादूगर वोल्डेमॉर्ट से दुश्मनी के बीच घूमती रहती है। इस सिल्सिले में कुल सात उपन्यास हैं :
- हैरी पॉटर और पारस पत्थर
- हैरी पॉटर और रहस्यमयी तहख़ाना
- हैरी पॉटर और अज़्कबान का क़ैदी
- हैरी पॉटर और आग का प्याला
- हैरी पॉटर और मायापंछी का समूह
- हैरी पॉटर और हाफ़-ब्लड प्रिंस
- हैरी पॉटर और मौत के तोहफ़े
सातों उपन्यासों के ऊपर कुल मिलाकर आठ फ़िल्में भी बनी हैं, जो सुपरहिट रही हैं और उन्होंने ऑस्कर भी जीते हैं। सारी सातों किताबों के हिन्दी संस्करण उपलब्ध हैं।
मुंशी प्रेमचंद जयंती 31/07/20268
मुंशी प्रेमचंद (धनपत राय श्रीवास्तव) आधुनिक हिंदी और उर्दू साहित्य के सबसे महान रचनाकारों में से एक हैं। उन्हें साहित्य जगत में "उपन्यास सम्राट" (Emperor of Novels) और आधुनिक हिंदी कथा-साहित्य का जनक माना जाता है।
मुंशी प्रेमचंद की मुख्य उपलब्धियां और उनका साहित्य में योगदान इस प्रकार है:
1. साहित्य में यथार्थवाद (Realism) की शुरुआत
- जमीनी सच्चाई का चित्रण: प्रेमचंद से पहले हिंदी साहित्य में राजा-रानी, जादुई और काल्पनिक कहानियां लिखी जाती थीं। उन्होंने पहली बार साहित्य को आम जनता, गरीब किसानों, मजदूरों और शोषित वर्ग से जोड़ा।
- सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार: उन्होंने अपनी रचनाओं के जरिए दहेज प्रथा, अनमेल विवाह, छुआछूत, जमींदारी शोषण और गरीबी जैसी गंभीर समस्याओं को बेबाकी से उठाया।
2. विशाल और कालजयी रचना संसार
प्रेमचंद ने अपने जीवनकाल में अद्भुत और असीमित साहित्य का सृजन किया: []
- 300 से अधिक कहानियां: उनकी कहानियां मानसरोवर नामक 8 भागों के संग्रह में संकलित हैं। 'कफन', 'पूस की रात', 'पंच परमेश्वर', 'ईदगाह' और 'बड़े भाई साहब' जैसी कहानियां आज भी विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हैं।
- 15 से अधिक प्रसिद्ध उपन्यास: उनका उपन्यास 'गोदान' भारतीय साहित्य के इतिहास के सबसे महान उपन्यासों में गिना जाता है। इसके अलावा 'गबन', 'सेवा सदन', 'निर्मला', 'रंगभूमि' और 'कर्मभूमि' उनके मील का पत्थर साबित होने वाले उपन्यास हैं।
3. भाषा शैली का सरलीकरण
- आम बोलचाल की भाषा: उन्होंने साहित्य को कठिन संस्कृतनिष्ठ हिंदी से निकालकर आम जनमानस की भाषा (हिंदुस्तानी - हिंदी और उर्दू का मिश्रण) में लिखा, जिससे साहित्य हर वर्ग के पाठक तक पहुंच सका।
4. स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान और पत्रकारिता
- देशभक्ति के कारण प्रतिबंध: 1908 में उनका पहला कहानी संग्रह 'सोजे-वतन' (राष्ट्र का विलाप) छपा। इसमें देशभक्ति की भावना इतनी कूट-कूट कर भरी थी कि ब्रिटिश सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया और इसकी सभी प्रतियां जलवा दीं।
- पत्रिकाओं का संपादन: उन्होंने भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना जगाने के लिए 'हंस' और 'जागरण' जैसी पत्रिकाओं का संपादन और प्रकाशन किया।
- सरकारी नौकरी का त्याग: महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी स्कूल सब-इंस्पेक्टर की सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था।
5. ऐतिहासिक नेतृत्व और सम्मान
- प्रगतिशील लेखक संघ के प्रथम अध्यक्ष: साल 1936 में लखनऊ में हुए 'प्रगतिशील लेखक संघ' (Progressive Writers' Association) के पहले ऐतिहासिक अधिवेशन की अध्यक्षता प्रेमचंद ने ही की थी।
- सिनेमा जगत पर प्रभाव: उनकी कहानियों पर सत्यजीत रे जैसे महान निर्देशकों ने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म 'शतरंज के खिलाड़ी' बनाई। इसके अलावा दूरदर्शन पर गुलज़ार द्वारा निर्देशित धारावाहिक 'तेहरीर... मुंशी प्रेमचंद की' बेहद लोकप्रिय रहा।
मरणोपरांत विरासत (Legacy)
प्रेमचंद को उनके जीवनकाल में कोई आधिकारिक सरकारी पुरस्कार नहीं मिला, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है:
- भारतीय डाक विभाग ने 1980 में उनके सम्मान में एक विशेष डाक टिकट जारी किया।
- साहित्य अकादमी ने साल 2005 में सार्क (SAARC) देशों के संस्कृति विशेषज्ञों के लिए 'प्रेमचंद फेलोशिप' की शुरुआत की।
- उनके 136वें जन्मदिन पर Google ने डूडल (Google Doodle) बनाकर उन्हें वैश्विक स्तर पर सम्मानित किया था।
National Librarian Day 12/08/2026
डॉ. एस.आर. रंगनाथन
चित्र में दिख रहे व्यक्ति पद्मश्री डॉ. एस.आर. रंगनाथन (12 अगस्त 1892 – 27 सितंबर 1972) हैं। उन्हें विश्व स्तर पर "भारत में पुस्तकालय विज्ञान के जनक" के रूप में सम्मानित किया जाता है ।
प्रमुख योगदान
डॉ. रंगनाथन ने अपने अग्रणी शैक्षणिक ढाँचों के माध्यम से सूचना को संरचित करने और उसे सुलभ बनाने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव लाए:
- पुस्तकालय विज्ञान के पाँच नियम: 1931 में प्रतिपादित ये सिद्धांत पुस्तकालय संचालन और सूचना प्रबंधन के लिए अंतिम मूलभूत मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते हैं:
- पुस्तकें उपयोग के लिए हैं ।
- हर पाठक अपनी किताब पढ़ता है ।
- हर किताब का अपना पाठक होता है ।
- पाठक का समय बचाएं ।
- पुस्तकालय एक विकासशील जीव है ।
- कॉलन वर्गीकरण प्रणाली: उन्होंने इस अत्यधिक अनुकूलनीय, बहुआयामी वर्गीकरण प्रणाली का आविष्कार किया, जिसने पुस्तकों को कठोर संख्यात्मक सूचियों के बजाय बहुआयामी वर्णनात्मक शब्दों का उपयोग करके गतिशील रूप से वर्गीकृत करने की अनुमति दी।
- संस्थागत विकास: उन्होंने कई भारतीय राज्यों में पुस्तकालय संबंधी विधायी ढांचों का नेतृत्व किया और इंडियन लाइब्रेरी एसोसिएशन जैसी मूलभूत संस्थाओं की स्थापना की।
राष्ट्रीय मान्यता
शिक्षा, प्रलेखन और पुस्तकालय विज्ञान में उनके अपार योगदान को मान्यता देते हुए, भारत सरकार ने उन्हें 1957 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया। 12 अगस्त को उनकी जयंती देश भर के पेशेवर पुस्तकालयाध्यक्षों को सम्मानित करने और आजीवन सीखने को बढ़ावा देने में पुस्तकालयों द्वारा निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देने के लिए एक दिन के रूप में मनाई जाती है।
यदि आप और अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो मुझे बताएं:
- पांचों नियमों की विस्तृत व्याख्या ।
- कॉलन वर्गीकरण प्रणाली आधुनिक डिजिटल प्रणालियों से किस प्रकार भिन्न है?
- डॉ. रंगनाथन का गणितज्ञ से पुस्तकालय विज्ञान के अग्रणी के रूप में परिवर्तन।
Subscribe to:
Posts (Atom)
-
Library orientation for class 6 students A library orientation for Class 6 familiarize students with the library's resources and servi...
-
—Conduct of various activities like- Book Review, Story Telling , Quiz, Teacher’s speech and Mass Reading by students and teachers dur...