डॉ. एस.आर. रंगनाथन
चित्र में दिख रहे व्यक्ति पद्मश्री डॉ. एस.आर. रंगनाथन (12 अगस्त 1892 – 27 सितंबर 1972) हैं। उन्हें विश्व स्तर पर "भारत में पुस्तकालय विज्ञान के जनक" के रूप में सम्मानित किया जाता है ।
प्रमुख योगदान
डॉ. रंगनाथन ने अपने अग्रणी शैक्षणिक ढाँचों के माध्यम से सूचना को संरचित करने और उसे सुलभ बनाने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव लाए:
- पुस्तकालय विज्ञान के पाँच नियम: 1931 में प्रतिपादित ये सिद्धांत पुस्तकालय संचालन और सूचना प्रबंधन के लिए अंतिम मूलभूत मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते हैं:
- पुस्तकें उपयोग के लिए हैं ।
- हर पाठक अपनी किताब पढ़ता है ।
- हर किताब का अपना पाठक होता है ।
- पाठक का समय बचाएं ।
- पुस्तकालय एक विकासशील जीव है ।
- कॉलन वर्गीकरण प्रणाली: उन्होंने इस अत्यधिक अनुकूलनीय, बहुआयामी वर्गीकरण प्रणाली का आविष्कार किया, जिसने पुस्तकों को कठोर संख्यात्मक सूचियों के बजाय बहुआयामी वर्णनात्मक शब्दों का उपयोग करके गतिशील रूप से वर्गीकृत करने की अनुमति दी।
- संस्थागत विकास: उन्होंने कई भारतीय राज्यों में पुस्तकालय संबंधी विधायी ढांचों का नेतृत्व किया और इंडियन लाइब्रेरी एसोसिएशन जैसी मूलभूत संस्थाओं की स्थापना की।
राष्ट्रीय मान्यता
शिक्षा, प्रलेखन और पुस्तकालय विज्ञान में उनके अपार योगदान को मान्यता देते हुए, भारत सरकार ने उन्हें 1957 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया। 12 अगस्त को उनकी जयंती देश भर के पेशेवर पुस्तकालयाध्यक्षों को सम्मानित करने और आजीवन सीखने को बढ़ावा देने में पुस्तकालयों द्वारा निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देने के लिए एक दिन के रूप में मनाई जाती है।
यदि आप और अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो मुझे बताएं:
- पांचों नियमों की विस्तृत व्याख्या ।
- कॉलन वर्गीकरण प्रणाली आधुनिक डिजिटल प्रणालियों से किस प्रकार भिन्न है?
- डॉ. रंगनाथन का गणितज्ञ से पुस्तकालय विज्ञान के अग्रणी के रूप में परिवर्तन।
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